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Sunday, August 25, 2013

अज़ीज़ जौनपुरी : लन्दन की फ़ज़ाओं में

    लंदन  की फ़ज़ाओं में 



   क्या  हुस्न   क्या  अदा   है  लंदन  की   फ़ज़ाओं में 
   मदहोस     मोहब्बत   है     लंदन    की   सदाओं में 

   थेम्स  की   नज़ाकत    है , कुदरत  का   करिश्मा है
   शोला  भी  है   शबनम  भी  है  लंदन  की  हवाओ में 

    हर आँख में सागर है,मय है  हुश्न -ए-साज़े- तरब है 
    गुलनार  की  खुशबू  है,  मदहोश काफ़िर अदाओं  में 

    हर  रुखसार पे जड़े हैं सुर्खी के बहकते नगीने  लाखों   
   बहकी हुयी तबस्सुम  फिरती है,लन्दन की वफ़ाओं में  

   रक्से मय तेज़ करो तेज़ करो कि न हिज्र की रात रहे  
   ज़ाम छलकाते माहताब उतरा है लन्दन की हवाओं में 

   एक   बात   अखरती  है    मेरे   दिल    पे गुज़रती  है 
   तहज़ीबो  गंगो- ज़मन लुट गई  लन्दन की  हवाओं में  

                                                  अज़ीज़ जौनपुरी